उदयपुर की सहकारी संभाग की एक मात्र सरस डेरी ने गत वर्ष मई माह में मात्र दो माह के अन्तराल में ही दूध के २५ प्रतिशत भाव बड़ा कर मध्यम वर्ग के उपभोक्ता की कमर तोड़ दी है एवं अब ११ माह बाद पुनः दूध के भाव बढाने की तैयारीमें प्रस्ताव डेयरी फेडरेशन , जयपुर के पास भेजा है। दूध रोज़मर्रा की जिन्दगी का अत्यावाशक पेय है। सुबह उठते ही उपभोक्ता की चाय की चुस्की को बे स्वाद करना कतई उचित नंही हैं। विशेष रूप से गरीब एवं मध्यम वर्गीय उपभोक्ता पर जबरदस्त चोट है। दूध जैसे पेय को एक वर्ष के अन्तराल में २५ से ३० प्रतिशत महंगा करने से देश के होनहार बच्चे जिनमें अधिकांश पहले से ही कुपोषण के शिकार हैं को और कुपोषित होने को विवश होना पड़ेगा। सहकारिता का तात्पर्य दूध उत्पादक किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिले तथा उपभोक्ता को भी वाजिक दम पर दूध विक्रय किया जाय।
डेयरी का यह तर्क गले नंही उतरता की उन्होंने दूध के क्रय मूल्य को गत वर्ष २२५ रुपये प्रति किलो वसा(फेट) से बड़ा कर २८० रुपये प्रति किलो फेट कर किसोनों को लाभ पहुँचाने की खातिर दूध के भाव बढाये हैं अवं अभी २९० रुपये प्रति किलो फेट करके दूध को एक रुपये प्रति लीटर और महंगा किया जानाप्रस्तावित हैं। यहाँ प्रश्न यह उठता है की आख़िर जो दूध किसान से जिस भाव पर ख़रीदा गया है उस दूध को प्रोसेस अवं पैकिंग करने पर प्रतिलीटर कितना वाजिक खर्च आना चाहिए । डेयरी में तकनिकी एवं मैनेजमेंट के दक्ष लोगों को उंच वेतनमान पर लगा रखा है। उनको उंच वेतन एवं सुविधाएँ देने के उपरांत भी उनका दूध के प्रोसेसिंग, पैकिंग, वितरण आदि के खर्च में कमी कर सकने में उनकी अक्षमता ने उनकी योग्यता पर प्रश्न चिह्न खड़ा किया है। आख़िर राज्य का निरीह उपभोक्ता इस सफ़ेद हाथी को चुपचाप कहाँ तक बर्दास्त करता रहेगा? एक और देश में थोक सूचकांक घाट रहा है, तेल एवं अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के भाव कम किए जा रहे है तो दूसरी और हमारी सहकारी क्षेत्र की डेयरी दूध के भाव बढाने को आमादा है। गरीब एवं मध्यमवर्गी जनता की तो इस मंहगे दूध ने पहले से ही कमर तोड़ राखी है एवं अब और महंगा करने से गरीब व् मध्यमवर्गीय उपभोक्ता को अब मेहमानवाजी चाय की बजाय पानी से करने को बाध्य होना पड़ेगा।
वास्तव में डेयरी प्रशासन का यह तर्क थोथा एवं मिथ्या है की किसान से ख़रीदे गए दूध की ज्यादा कीमत अदा करने से दूध का भाव बढाया जाना उनकी मजबूरी है। अब सुविज्ञ पाठक स्वयं विवेचन करें की जो दूध डेयरी प्रशासन अपने फुल क्रीम ब्रांड (व्होल मिल्क)से २५ रुपया प्रतिलीटर में बेच रहा है उसका किसान से २८० रूपया प्रति किलो फेट डर से क्रय मूल्य मात्र १६.८० रुपया बैठता है। इसी प्रकार टोंडदूध की लागत ८.४० रूपया एवं विक्रय मूल्य २० रूपया, डबल टोंड की लागत ४.२० रुपया एवं विक्रय मूल्य १८ रुपया, स्टैण्डर्ड दूध की लागत १२.६० रुपया होकर विक्रय मूल्य २२ रुपया होने से डेयरी के दूध की लागत एवं विक्रय मूल्य के मध्य अंतर क्रमश फुल क्रीम में ८.२० रुपया, टोंड में १२.६० रुपया, डबल टोंड में १३.८० रुपया एवं स्तंदर दूध में ९.४० रुपया प्रति लीटर बैठता है। इतना मार्जिन किसी अन्य व्यापारमें देखने सुनने में नही आया। डेयरी प्रशासन आंकडों के मकड़जाल एवं वाक्पटुता से किसानो को अधिक कीमत देने की मात्र थोथी घोषणा कर जनता को गुमराह कर उसके इस जीवनदायी पेय को कभी किसानों की आड़ लेकर तो कभी गर्मी का रोना रोकर महंगा करता जा रहा है। ऐसा भी नंही है की डेयरी प्रशासन दौराने प्रोसेसिंग किसी भी तरह की ताकत की दवाएं या विटामिन्स या काजू बादाम इस दूध में मिलकर ज्यादा पौष्टिक बना रहा हो जिससे की दूध की लागत में बढोतरी किया जाना अपरिहार्य हो। नीचे दिए गए विवरण से सुधि पाठक स्वयं निर्णय करें की दूध का खरीद एवं विक्रय मूल्य का अन्तर कितना वाजिब एवं जायज है।
रेट प्रति लीटर
१.१.०८ १६.१.०८ ३०.३.०८ १५.५.08
१.१.०८ १६.१.०८ ३०.३.०८ १५.५.08
क्रय विक्रय क्रय विक्रय क्रय विक्रय क्रय विक्रय
१- टोंड दूध ३ प्रतिशत वसा -- ६.७५ १५.०० ६.७५ १७.०० ८.४० १८.०० ८.४० २०.००२- डबल टोंड १.५% वसा -- ३.३७ १३.०० ३.३७ १५.०० ४.२० १६.०० ४.२० १८.००
३- स्टैण्डर्ड दूध ४.५% वसा -- १०.१२ १७.०० १०.१२ १९.०० १२.६० २०.०० १२.६० २२.००
४- फुल क्रीम होल मिल्क ६% फेट १३.५० २०.०० १३.५० २२.० १६.८० २४.०० १६.८० २५.००
ऊपर दी गयी सारिणी में हलके अंक क्रमश १.१.०८, १६.१.०८, ३०.३.०८ एवं १५.५.०८ का खरीद मूल्य दर्शाते हैं जबकि बोल्ड अंक उपर्युक्त तारीखों के दूध के विक्रय मूल्य दर्शाते हैं।
अतः जन हित में सहकारी डेयरी के इस मकड़जाल से उपभोक्ताओं को अवगत एवं जागरूक किया जाना आवश्यक है ताकि उन्हें बार बार कीमतें बड़ा कर शोषित कियस जाने के प्रति डेयरी प्रशासन एवं सरकार को आगाह किया जा सके। किसानों को अधिक देने का जो ढिंढोरा पीटा जा रहा हैं वह सर्वथा अनुचित हैं। आज वस्तुस्थिति यह है की किसान से स्टैण्डर्ड दूध १२.६० रूपये में खरीद कर उसे २२ रूपये में बेचा जाना कहाँ तक उचित है? क्या डेयरी के सक्षम अधिकारी एवं फेडरेशन में बैठने वाले जन प्रतिनिधि, तकनिकी एवं विशेषज्ञ दूध के प्रोसेसिंग, ट्रांसपोर्टेशन, पैकिंग, विज्ञापन एवं भारी प्रशसनिक खर्चों में कटोती कर दूध के खरीद एवं विक्रय मूल्य के अंतर को कम कर ४ रुपया प्रति लीटर तक लाकर अपनी दक्षता प्रतिपादित करते हुए जनता एवं आम उपभोक्ता को राहत नही दे सकते?
हिन्दी ब्लॉग की दुनिया में आपका तहेदिल से स्वागत है....
ReplyDeleteअच्छा लिखा है आपने , इसी तरह अपने विचारों से हमें अवगत करते रहे , हमें भी उर्जा मिलेगी
ReplyDeleteधन्यवाद
मयूर
अपनी अपनी डगर
बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
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